अनिल कांत शर्मा
कुल्लू। कांगड़ा और कुल्लू जिलों को जोड़ने वाली प्रस्तावित भूबू जोत सुरंग सामरिक, यातायात और पर्यटन की दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) खुशहाल ठाकुर ने कहा कि सुरंग के निर्माण से पठानकोट से लेह-लद्दाख तक की दूरी और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे न केवल सामरिक दृष्टि से रणनीतिक आवाजाही सुदृढ़ होगी, बल्कि आम लोगों को भी बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी।
उन्होंने बताया कि सुरंग बनने से कुल्लू से कांगड़ा एयरपोर्ट और पठानकोट तक पहुंच आसान होगी। इसके साथ ही आपात सेवाओं और सुरक्षा बलों की आवाजाही तेज और सुगम हो सकेगी। परियोजना के अनुसार सुरंग का पोर्टल कुल्लू मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर की दूरी पर प्रस्तावित है, जबकि इसकी लंबाई लगभग 3.1 किलोमीटर होगी। सुरंग के माध्यम से वर्षभर यातायात संभव हो पाएगा, जो अभी मौसम पर निर्भर रहता है।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, रोजगार के खुलेंगे नए अवसर
भूबू जोत सुरंग का सीधा लाभ मंडी जिले के बरोट और जोगिंदर नगर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों को मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां तेज होंगी, जिससे होटल, टैक्सी, गाइड और अन्य स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा सुरंग बनने से कांगड़ा, मंडी, कुल्लू और लाहुल सहित आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के विकास, पर्यटन विस्तार और सामरिक सुरक्षा के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाली योजना साबित होगी।
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