साहिल काचरू | भुंतर
एनएचएआई की लापरवाही का खामियाजा जिया गांव के किसानों और बागवानों को भुगतना पड़ रहा है। फोरलेन सड़क के किनारे निकासी नालियों का समुचित प्रावधान न होने के कारण बारिश का पूरा पानी किसानों के खेतों और बागीचों में घुस रहा है, जिससे उनकी फसलें खराब हो रही हैं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों और ग्राम पंचायत जिया द्वारा इस समस्या को लेकर जिला प्रशासन और एनएचएआई से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है।
किसान एवं बागवान तथा पूर्व बीडीसी सदस्य वीर सिंह ने बताया कि फोरलेन से बहकर आने वाला पानी सीधे उनके खेतों और बागीचों में पहुंच रहा है, जिससे फसलें नष्ट हो रही हैं। उन्होंने एनएचएआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सड़क निर्माण के साथ निकासी नालियों का होना अनिवार्य है, लेकिन जिया फोरलेन में यह व्यवस्था पूरी तरह नदारद है।
उन्होंने बताया कि एक तरफ जहां नाली अधूरी है, वहीं दूसरी ओर निकासी नाली का नामोनिशान तक नहीं है। इसी कारण बरसात के समय सारा पानी खेतों में भर जाता है। इस संबंध में उपायुक्त कुल्लू को भी लिखित शिकायत सौंपी जा चुकी है।
ग्राम पंचायत जिया के प्रधान संजू पंडित ने कहा कि निकासी नालियों के निर्माण को लेकर पंचायत की ओर से कई बार प्रशासन को प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। उन्होंने बताया कि नालियों के अभाव में बारिश के दौरान सड़क पर भी पानी जमा हो जाता है, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है।
बरसात के मौसम में पैदल चलने वालों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। जिया गांव को जाने वाली संपर्क सड़कों की हालत भी खराब हो जाती है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए सड़क पर जमा बारिश का पानी बड़ी मुसीबत बन जाता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि एनएचएआई जल्द से जल्द फोरलेन के दोनों ओर उचित निकासी नालियों का निर्माण करे, ताकि किसानों की फसलें बचाई जा सकें और आम लोगों को राहत मिल सके।
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