सतीश ठाकुर
मंडी। बेमौसमी बर्फबारी के बाद अचानक लौटी ठंडक ने वन्य जीवों को भी प्रभावित कर दिया है। ऊंचाई पर विचरने वाले जीव नीचले क्षेत्रों में दिखने लगे हैं। विगत दिनों बालीचौकी में एक सांभर और घोरल को चिखते चिल्लाते लोगों ने रेस्क्यू के नाम पर दौड़ा दौड़ा कर मार डाला और बिना उचित जांच पड़ताल किए वन विभाग ने उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया।
इन घटनाओं के ठीक विपरीत रविवार को सराज वन परिक्षेत्र के लेहगला में एक काकड़ सड़क पर नजर आया। कार सवारों ने बड़े ही इत्मीनान से इस बेजुबान को जाने दिया और वीडियो भी बनाई। एक अन्य कार चालक ने वीडियो बना रहे कार सवारों की गाड़ी को ओवरटेक कर ककड़ को डराना चाहा लेकिन इन युवकों ने आवाज देकर उनको टोका तो उन्होंने भी इस जीव को जाने दिया। कार सवार विशन देव ने बताया कि काकड़ गाड़ी को देखकर घबरा गया लेकिन हमने स्पीड कम कर दी और ककड़ अपने रास्ते सकुशल जंगल की ओर चला गया।
डीएफओ सुरेन्द्र कश्यप के अनुसार, जंगली जानवरों में कैप्चर मायोपैथी (पकड़ने के दौरान होने वाली मांसपेशी संबंधी बीमारी) मौत की प्रमुख वजह बनती है। जब जानवर को जबरन दौड़ाया या डराया जाता है, तो उसके शरीर में तनाव से हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। मांसपेशियों में ऑक्सीजन की कमी पड़ती है, लैक्टिक एसिड जमा होता है, जिससे मांसपेशियां टूटने लगती हैं। इससे किडनी फेलियर तक हो सकता है और जानवर की मौत हो जाती है। यह स्थिति अक्सर कैद या ट्रांसपोर्टेशन के दौरान देखी जाती है, लेकिन यहां भीड़ के शोर और पीछा करने से भी यही हो रहा है। उन्होंने लेहगला के समीप सड़क पर पहुंचे काकड़ को सुरक्षित जंगल जाने देने पर कार सवार युवकों की सराहना की।
If you need any old news please select this date then find.
If you need important news in your email please subscribe for newsletter.
©2026 Snower Samachar. All Rights Reserved. Developed by Artisans Labs