सतीश ठाकुर
मंडी। लोग इंटरनेट पर चैट या कॉल करने के लिए जितने भी ऐप इस्तेमाल करते हैं, अब उनके लिए एक बड़ा बदलाव होने वाला है। दरअसल, 1 मार्च से ‘सिम-बाइंडिंग’ लागू हो जाएगा। आसान भाषा में कहें तो इसका मतलब यह है कि जिस सिम कार्ड से अकाउंट बनाया गया है, अगर वह फोन से निकाल दिया जाता है, तो उस फोन में ऐप चलना बंद हो जाएगा।
केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि सिम-बाइंडिंग से जुड़े नियमों में कोई ढील या छूट नहीं दी जाएगी। संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को साफ किया कि 1 मार्च से यह नियम लागू हो जाएगा और इसके लिए डेडलाइन आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। इसका मतलब है कि 1 मार्च से Whatsapp, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे ऐप चलाने के लिए आपके मोबाइल में सिम कार्ड लगा होना बहुत जरूरी है। फिलहाल कई लोग वॉट्सऐप को बिना सिम कार्ड भी इस्तेमाल करते हैं।
क्या है सिम बाइंडिंग का नया नियम?
1 मार्च से वाट्सऐप और सिग्नल जैसे ऐप्स को अपने अकाउंट्स को सिम कार्ड से ‘बाइंड’ यानी जोड़ना जरूरी होगा इसका सीधा मतलब यह है कि आपका वाट्सऐप या सिग्नल ऐप तभी काम करेगा जब रजिस्टर किया गया सिम कार्ड फिजिकल रूप से आपके फोन में मौजूद और एक्टिव होगा। आप किसी दूसरे फोन के नंबर से अपने फोन में वाट्सऐप नहीं चला सकेंगे अगर वह सिम आपके फोन में नहीं है।
कंपनियों ने जताई चिंता
इंटरनेट कंपनियों (जैसे Meta, Google) का कहना है कि यह नियम तकनीकी रूप से काफी कठिन है. उन्होंने तर्क दिया है कि कई टैबलेट और लैपटॉप में सिम स्लॉट नहीं होते, वहां इन ऐप्स को चलाना मुश्किल हो जाएगा। इससे यूजर्स का अनुभव खराब हो सकता है। हालांकि, सरकार का मानना है कि यूजर एक्सपीरियंस से ज्यादा जरूरी देश की सुरक्षा है।
कंप्यूटर पर WhatsApp चलाने वालों के लिए नियम
जो लोग WhatsApp का इस्तेमाल कंप्यूटर पर लिंक्ड डिवाइस के तौर पर करते हैं, उनका सेशन हर 6 घंटे में लॉग आउट हो जाएगा।