के के ठाकुर।
औट। जिला के औट में फोरलेन निर्माण के चलते विस्थापित दुकानदारों के पुनर्वास की प्रक्रिया आखिरकार शुरू हो गई। शनिवार को एसडीएम बाली चौकी, विचित्र सिंह द्वारा लकी ड्रॉ के माध्यम से बचत समिति द्वारा नवनिर्मित मार्केट कॉम्प्लेक्स की 6 दुकानों का आवंटन किया गया। लेकिन 32 प्रभावितों में से केवल 6 को ही राहत मिलने से बाकी 26 परिवारों में रोष है।
वर्ष 1992 में प्रशासन ने स्वरोजगार के लिए 32 दुकानें बनवाई थीं, जो ‘केशव माधव मार्केट’ के नाम से जानी जाती थीं। स्थानीय ड्राई फ्रूट्स और ऑर्गेनिक उत्पादों के चलते यह बाजार पर्यटकों में भी लोकप्रिय था।
लेकिन 2018 में NHAI के आदेश पर इन दुकानों को अवैध घोषित कर एक महीने के भीतर तोड़ दिया गया। इससे 32 परिवारों की रोजी-रोटी छिन गई ।
प्रशासन ने नई दुकानों का आश्वासन दिया था, लेकिन निर्माण में 8 साल लग गए। नए कॉम्प्लेक्स में केवल 18 दुकानें बनाई गई हैं, जबकि विस्थापित 32 थे। इसके साथ ही प्रति दुकान 5,700 रुपये किराया तय किया गया है।
शनिवार को केवल सड़क किनारे की 6 दुकानों का आवंटन हुआ है। शेष 12 दुकानों के लिए अभी तिथि तय नहीं हुई है।
सबसे बड़ी चिंता उन 14 दुकानदारों की है, जिन्हें इस कॉम्प्लेक्स में जगह ही नहीं मिल पाई है।
स्थानीय दुकानदारों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि 8 साल बाद भी सभी प्रभावितों को समान अवसर नहीं मिला। उन्होंने मांग की है कि शेष दुकानों का जल्द निर्माण कर सभी विस्थापितों को पुनर्वास दिया जाए स्थानीय दुकानदार सुरेश गुप्ता, रोशन लाल, परवीन, हेमराज वर्मा, अमर सिंह, रवि शर्मा, दिनेश कुमार, दौलत राम, इंदर सिंह, लुदरमणि, और सतीश कुमार आदि ने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द शेष 14 दुकानों का निर्माण करे ताकि सभी विस्थापितों को समान रूप से रोजगार मिल सके।
एसडीएम बाली चौकी विचित्र सिंह का कहना है कि शेष 12 दुकानों का आवंटन जल्द किया जाएगा। वहीं, बाकी 14 दुकानदारों के लिए अलग से स्थान चिन्हित कर नई दुकानों के निर्माण की योजना बनाई जा रही है।
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