कुलदीप शर्मा/पधर (मंडी)
द्रंग क्षेत्र में नारला-बिजनी सुपर हाईवे परियोजना के निर्माण के दौरान गावर कंस्ट्रक्शन कंपनी की कथित लापरवाही से खतरे की जद में आए दो रिहायशी मकानों के प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत मिली है। ग्रामीणों के उग्र प्रदर्शन के बाद एनएचएआई, प्रशासन और आरओडब्ल्यू समिति के बीच हुए लिखित समझौते के अनुसार दोनों मकानों को भू-अधिग्रहण के दायरे में लेकर प्रभावित परिवारों को नियमानुसार उचित मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
समझौते के तहत मुआवजा राशि जारी होने तक प्रभावित दोनों परिवारों के लिए छह माह तक किराए के मकान का खर्च गावर कंस्ट्रक्शन कंपनी वहन करेगी। वहीं दोनों मकानों का मूल्यांकन लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से करवाया जाएगा। मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर भू-अधिग्रहण अधिकारी के माध्यम से प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में मुआवजा राशि जारी की जाएगी।
समझौते में घटना स्थल से मलबा हटाने तथा प्रभावित क्षेत्र में उत्पन्न अन्य समस्याओं के समाधान का भी प्रावधान किया गया है, ताकि प्रभावित परिवारों को जल्द राहत मिल सके।
यह लिखित समझौता विधायक द्रंग पूर्ण चंद ठाकुर की उपस्थिति में तहसील कार्यालय पधर में हुआ। इस दौरान एनएचएआई के सहायक निदेशक कुलदीप सिंह, डीपीओ अमित ठाकुर, तहसीलदार पधर विकास कौंडल तथा आरओडब्ल्यू समिति के प्रतिनिधियों ने समझौते पर सहमति जताई। सभी पक्षों ने शपथ पत्र तैयार कर आरओडब्ल्यू समिति को सौंप दिया।
इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य चंपा ठाकुर, पधर मंडल कांग्रेस अध्यक्ष गिरधारी लाल भंगालिया, पंचायत प्रधान शकुंतला देवी, उपप्रधान जीत कुमार ठाकुर, बीडीसी सदस्य हजारा सिंह, दिनेश शास्त्री सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे।
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