मंडी। कीरतपुर-मनाली फोरलेन के किनारे बनी व्यावसायिक संपत्तियों के मालिकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मंडी और कुल्लू क्षेत्र में फोरलेन के किनारे स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस मिलने का सिलसिला शुरू होने की सूचना के बाद प्रवेश मार्गों और निर्माण संबंधी अनुमतियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सुत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश में भी अब होटल, ढाबे, रेस्तरां और दुकानों सहित अन्य प्रतिष्ठानों के मालिकों को राष्ट्रीय राजमार्ग से सीधे प्रवेश के लिए निर्धारित नियमों के तहत अनुमति लेनी पड़ेगी। फोरलेन से पांच मीटर के दायरे में बने निर्माणों को लेकर भी अनुमति का पेच फंसने की आशंका है। मंडी-कुल्लू के अलावा शिमला-परवाणु हाईवे व कीरतपुर से सुंदरनगर तक भी नोटिस दिए जाने की प्रक्रिया जारी हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे निजी जमीन का मालिकाना हक होने से राजमार्ग पर सीधे प्रवेश का अधिकार स्वतः नहीं मिल जाता। प्रवेश मार्ग की स्वीकृति सड़क सुरक्षा, तकनीकी मानकों और संबंधित प्राधिकरण के नियमों के आधार पर तय होती है। ऐसे में कारोबारियों को अपने प्रतिष्ठानों तक पहुंचने वाले रास्तों की वैधता और अनुमति संबंधी दस्तावेजों की जांच करनी पड़ सकती है।
इस कार्रवाई का वास्तविक दायरा संबंधित विभाग की ओर से जारी नोटिसों और उनमें उल्लिखित नियमों से स्पष्ट होगा।
राजमार्ग प्रवेश पोर्टल से मिलेगी अनुमति संबंधी जानकारी
केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रवेश अनुमति की प्रक्रिया के लिए राजमार्ग प्रवेश पोर्टल उपलब्ध कराया है। इसके माध्यम से संबंधित श्रेणियों के आवेदक प्रवेश अनुमति के लिए आवेदन कर सकते हैं और प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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